मिलिए 2009 बैच के आईएएस अधिकारी अवनीश शरण से, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से पाई सफलता

UPSC: कुछ ऐसे आईएएस अधिकारी होते हैं जो पोस्टिंग हो जाने के बाद केवल उसी जगह तक ही सीमित रहते हैं। वहीं, कुछ ऐसे भी अधिकारी होते हैं जो अपने काम के कारण लोगों के बीच में अपनी जगह बनाए रखते हैं। हम बात कर रहे हैं, साल 2009 बैच के आईएएस अधिकारी अवनीश शरण की जो सोशल मीडिया के माध्यम से अक्सर सुर्ख़ियों में रहते हैं। आज हम आपको इन्हीं के यूपीएससी सफर के बारे में बताएंगे।

अवनीश शरण मूलतः बिहार के समस्तीपुर जिले के केवटा गांव के रहने वाले हैं। इनके दादा और पिता दोनों ही शिक्षक थे, जबकि इनकी माता ग्रहणी रही हैं। अवनीश की प्रारंभिक शिक्षा गांव के एक सरकारी स्कूल से हुई है। इसके बाद उन्होंने मिथिला यूनिवर्सिटी से बैचलर्स की डिग्री पूरी की और फिर इलाहाबाद और दिल्ली में रहते हुए आगे की पढ़ाई की है। अवनीश का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था इसलिए उन्हें जीवन में कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा। उनके घर में लाइट न होने की वजह से उन्होंने लालटेन की रोशनी में बैठकर भी पढ़ाई की है।

अवनीश ने एक इंटरव्यू में बताया था कि बचपन में उनके गांव में कई बार आईएएस अधिकारी आया करते थे और वह उन्हें देखकर काफी प्रभावित होते थे। वहीं से उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास करने का मन बनाया और फिर 2009 में अपने कठिन परिश्रम की वजह से उन्होंने सफलता प्राप्त की। वर्तमान में अवनीश छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। बता दें कि अवनीश पढ़ाई में ज्यादा तेज तो नहीं थे लेकिन वह अपने पिता के कठिन परिश्रम से काफी प्रभावित थे। अवनीश का मानना है कि यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के दौरान आपके अंदर आत्मविश्वास होना आवश्यक है। इसके अलावा हर जगह से ज्ञान बटोरना चाहिए और गंभीरता के साथ पढ़ाई करनी चाहिए।

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बता दें कि अवनीश अपने सरल स्वभाव के चलते युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। वह अक्सर छात्रों को प्रोत्साहित करते रहते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था कि अवनीश ने कक्षा 10 में 44% अंक, कक्षा 12 में 65% अंक और ग्रेजुएशन में 60% अंक प्राप्त किए थे। इसका खुलासा करते हुए अवनीश ने कहा था कि यह सच है कि उन्हें स्कूल/कॉलेज में ऐसे अंक मिले हैं लेकिन इस तथ्य को पढ़ाई न करने और खराब ग्रेड प्राप्त करने के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यही नहीं उन्होंने अपनी बेटी का दाखिला एक सरकारी स्कूल में करके अन्य लोगों के लिए भी मिसाल कायम की है।




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