वेटर से आईएएस ऑफिसर बनने तक का सफर

UPSC Success Story: कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो! दुष्यंत कुमार की लिखी इन पंक्तियों को आपने बहुत बार सुना होगा लेकिन आज हम एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताएंगे, जिसने इन पंक्तियों को चरितार्थ कर दिया।

हम बात कर रहे हैं तमिलनाडु के रहने वाले के. जय गणेश की। उन्होंने छह बार सिविल सेवा परीक्षा दी और फेल हुए लेकिन कभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी। उनकी सातवीं परीक्षा ही उनकी आखिरी उम्मीद थी और इस बार किस्मत के सिक्के ने काम किया। वह 156वीं रैंक के साथ उत्तीर्ण हुए और भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुए।

जयगणेश का जन्म तमिलनाडु के उत्तरीय अम्बर के पास एक छोटे से गांव के एक गरीब परिवार में हुआ। उनके पिता एक फैक्ट्री में काम करके किसी तरह परिवार का गुज़ारा चलाते थे। जय गणेश हमेशा ही अपने गांव के लोगों की दयनीय स्थिति के बारे में सोचते थे। उनके गाँव के लोग गरीब थे और वह अपने गाँव के लोगों की मदद करना चाहते थे।

जय गणेश बचपन से ही प्रतिभावान थे। उन्होंने 8वीं तक अपने गांव के स्कूल में पढ़ाई की और 10वीं करने के बाद, एक पॉलिटेक्निक कॉलेज में दाखिला लिया क्योंकि वहां उन्हें बताया गया था कि जैसे ही वे पास होंगे उनके हाथ में एक नौकरी होगी। वहां उन्होंने 91 फीसदी अंकों के साथ परीक्षा पास किया। इसके बाद उन्होंने तांथी पेरियार इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी होने के बाद एक कंपनी में नौकरी भी लग गई, जहां उन्हें 2500 रुपये महीने वेतन मिलता था। जय गणेश को यह एहसास था कि इस वेतन में अपना परिवार चला पाना आसान नहीं है। वहीं दूसरी ओर उनके मन में आईएएस बनने क सपना भी पल रहा था इसलिए उन्होंने 2500 रुपये की नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की पढ़ाई शुरू कर दी।

जय गणेश ने यह रास्ता चुन तो लिया था लेकिन इस सफर को तय कर पाना इतना भी आसान नहीं था। वह छह बार यूपीएससी की परीक्षा में असफल हुए। साथ ही, उनके सामने एक आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया था। जय गणेश ने फिर भी हार नहीं मानी। उन्होंने एक होटल में वेटर का काम शुरू कर दिया। काम से लौटने के बाद जितना भी समय मिलता उसमें वह केवल अपनी पढ़ाई करते थे। जय गणेश यूपीएससी की परीक्षा में तो असफल हुए थे लेकिन इसी बीच उनका चयन इंटेलीजेंस ब्यूरो की परीक्षा में हो गया था।

उनके लिए यह तय कर पाना बहुत मुश्किल था कि वह अपने संघर्ष को विराम देकर नौकरी को चुने या फिर सातवीं बार यूपीएससी की परीक्षा दें। आखिरकार उन्होंने यूपीएससी को चुना और इस बार उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने इस परीक्षा में 156वीं रैंक हासिल की। खुद पर विश्वास और निरंतर मेहनत ही उनकी सफलता का कारण बना।




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